भीनमाल में 20 से 25 साल से दो चेहरे….देखे कब कौन कितने वोटो से जीता – विशेष भीनमाल विधानसभा से ग्राउड रिपोर्ट

– भीनमाल विधानसभा में लंबे समय से डॉ समरजीत सिंह व पूराराम चौधरी लंबे समय से विधायक की कुर्सी पर विराजमान है

– बड़ी पार्टियों की ओर से परिवर्तन किया जाए तो, जनता कर सकती है बदलाव के चेहरे को पसंद

राजस्थान भारती. भीनमाल

करीब 20 से 25 साल से भीनमाल में दो व्यक्ति ही विधायक की कुर्सी पर जम कर बैठे हुए है वैसे तो जनता विकास, समस्याओं के नाम पर हजारों बात करती है मगर चुनाव आने पर पुन भेड़ चाल दिखा देती है जिसका परिणाम यह है कि भीनमाल में 20 साल से दो व्यक्ति विधायक की कुर्सी पर कब्जा जमाए बैठे है। वैसे कांग्रेस ने 2013 में ऊमसिंह राठौड को मौका दिया था मगर हकीकत यह है कि चौधरी वोट बैंक के आगे कांग्रेस आधे वोटों से हार कर पांच साल तक चुप्पी साध कर बैठना पड़ा है।

  • भीनमाल में 1993 से 2013 तक कौन कब रहा है विधायक और कितने वोटो से पिछे रही राजनीति जाने पूरी कहानी

1. समय था 1993 का भाजपा से पूराराम चौधरी व कांग्रेस से प्रेमसिंह दहिया मैदान में थे भाजपा ने एक तरफा जीत दर्ज की और पूराराम को 41610 व प्रेमसिंह दहिया को 27424 वोट मिले और पूराराम चौधरी ने 14186 वोटों के साथ विधायक बन कर भाजपा को विधायक की सीट जीतवा दी। पूराराम चौधरी के ये दिन जोश से भरे शुरूआती दिन थे।

2. सन् 1998 विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने प्रेमसिंह की स्थान पर कांग्रेस के सक्रिय नेता डॉ समरजित सिंह को मैदान में उतारा भाजपा ने पुन टीकट पूराराम चौधरी को दिया और 1998 में डॉ समरजीत सिंह अपने विधायक के पहले ही दौर में जीत दिला कर पार्टी के हीरो बन गए। हालाकिं इस चुनाव में पूराराम 7 हजार वोट से हारे थे। डॉ सिंह को 32740 व पूराराम चौधरी को 25313 वोट मिले।

3. समय था 2003 और एक बार फिर कांग्रेस के विजय प्रत्याक्षी डॉ समरजीत सिंह मैदान में थे और दूसरी तरफ भाजपा ने पूराराम पर विश्वास रखते हुए पुन टिकट दिया। डॉ समरजित सिंह लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीत गए और 2003 में भी विधायक की कुर्सी पर कांग्रेस की मुहर लगा दी महज दो हजार वोट पीछे रहकर पूराराम चौधरी को कुर्सी गवानी पड़ी, वह समय पूराराम चौधरी के लिए बहुत ही सघर्षशील रहा। पार्टी की ओर से बार बार विश्वास रखने के बाद भी लगातार दूसरी बार पूराराम अपनी पार्टी को सीट दिलाने में कामयाब नहीं हो सके।

4. 2008 में भाजपा ने लगातार दो बार हो चुके पूराराम चौधरी को पुन टिकट देकर चौधरी वोट बैंक पर विश्वास किया और और पूराराम ने अपने उसे संघर्षशील समय में अपनी व पार्टी की शाख के लिए भरपूर मेहनत की और डॉ समरजीसिंह को 21199 वोटों से हराकर विधायक की कुर्सी छीनकर भाजपा को जीत दिलाई। जिसमें पूराराम को 59669 व डॉ समरजीतसिंह को 38470 वोट के साथ संतुष्ट होना पड़ा।

5. 2013 विधानसभा चुनाव भाजपा ने पुन पूराराम चौधरी को टिकट दिया मगर कांग्रेस ने टिकट देने के अंतिम घड़ी में डॉ सिंह का टिकट काट कर ऊमसिंह राठौड को टिकट दिया। चुनाव का परिणाम तो पूराराम की जीत रही, और एक बार फिर बीजेपी ने विधायक की कुर्सी पर कब्जा जमा दिया। चुनाव मेंं पूराराम चौधरी को 93141 व ऊमसिंह को 52950 वोट ही मिले। आधे वोट के साथ ही कांग्रेस को संतुष्ट होना पड़ा। करीब 40191 हजार वोट से ऊमसिंह हार गए।

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विधानसभा चुनाव आते ही भाजपा कांग्रेस के साथ अन्य कई नाम सामने आ रहे है किस हद तक कौन कामयाब होगा यह तो वक्त ही बताएगा। मगर जनता 20 साल से एक कुर्सी पर राज कर रहे दो व्यक्तियों के अलावा किसी और को चुनेगी या वो ही भेड़ चाल रहेगा। यह सब आंकड़े बड़ी पार्टीयों के टीकट बांटने पर निर्भर करेगा। कांग्रेस से डॉ समरजीतसिंह टिकट की दौड़ में आगे दिखाई दे रहे है। वहीं भाजपा से पूराराम चौधरी व सांवलाराम देवासी सुर्खियों में है।