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    बस कंडक्टर से मंत्री तक का सफर…जाने कैसे शून्य से शिखर तक पहुंचे कैलाश चौधरी

    June 5, 2019

     

    राजस्थान भारती. विशेष

    1999 में पार्षद का चुनाव हारने वाले कैलाश चौधरी ठीक बीस साल बाद केंद्र में मंत्री बन जाते है यह कहानी किसी अजूबे से कम नहीं है। कैलाश चौधरी सबसे पहले कवास में बाढ के दौरान चर्चा में आए थे। आपको बता दे कि सोनिया गांधी दौरे पर आई थी बाढ़ के दौरान और कैलाश उन से भिड़ गए। जिसको लेकर चौधरी काफी चर्चा में रहे थे।

    कैलाश बायतु से विधायक चुनाव हारे 5 माह बाद भाजपा से सांसद चुनाव लडेे और जीते :

    मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में शामिल एक मंत्री का नाम भले ही किस्मत की बाजी कहा जा रहा हो, लेकिन इनके जीवन के पीछे भी संघर्ष कम नहीं हैय वर्श 2006 में सोनिया गांधी से भिडने की हिम्मत करने वाले कैलाश चौधरी ने अपनी कम उम्र में ही कई प्रदर्शनों से सबको चौंका दिया है

    आइए जानते हैं कैलाश चौधरी के जीवन का सफर

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल बाड़मेर.- जैसलमेर से नव निर्वाचित सांसद कैलाश चौधरी का शुरुआती राजनीतिक सफर काफी संघर्षमय रहा। बचपन से आरएसएस से जुड़ाव व छात्र राजनीति से कॅरियर की शुरुआत कर 2013 में बायतु से विधायक बने और अब पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़े और सांसद जीत मंत्री बने हैं।

    जनता के लिए लड़े डंडे खाए और जेल भी गए :

    कैलाश छात्र राजनीति से ही दबंग थे। उन्होंने कई बार धरना.प्रदर्शन किए। बालोतरा में फैक्ट्रियां बंद होने व मजूदरों का रोजगार छीनने पर वे चार माह तक धरने पर बैठे। पुलिस ने लाठियां बरसाईं जेल भी गए। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उनकी हिस्ट्रीशीट खोल दी तब भूख हड़ताल के कारण उन्हें अल्सर भी हो गया था। इससे पूर्व बालोतरा में पीजी कॉलेज खुलवाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत से मिले तो बालोतरा में कॉलेज खुला।

    टर्निंग पॉइंट बाढ़ पीडि़तों के लिए 2006 में सोनिया गांधी से उलझे

    2006 में कवास में भीषण बाढ़ आई 150 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। कैलाश चौधरी आरएसएस से जुड़े हुए थे। बालोतरा से 6 हजार खाने के पैकेट तैयार करवाकर सूर्योदय से पहले कवास पहुंचे और बाढ़ पीडि़तों में बांटे। इस दौरान जायजा लेने आईं तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी व मुख्यमंत्री गहलोत को ज्ञापन देने के दौरान कैलाश उलझ गए थे। पुलिस ने कैलाश पर डंडे बरसाए थे। यह दिन कैलाश के लिए राजनीति का टर्निंग पॉइंट रहा।

    संसद के 67 साल के इतिहास में ये दूसरा मौका हैए जब बाड़मेर से सांसद को मंत्री बने हैं

    संसद के 67 साल के इतिहास में ये दूसरा मौका हैए जब बाड़मेर से सांसद को मंत्री बने हैं। इससे पूर्व 1990.91 तक कल्याणसिंह कालवी केंद्रीय ऊर्जा मंत्री रहे। इसके बाद दूसरे सांसद कैलाश चौधरी हैंए जो केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं। चौंकाने की बात यह है कि स्नातक उत्तीर्ण करने के बाद जब राजनीति में कोई खास पहचान नहीं मिली तो कैलाश चौधरी ने आजीविका चलाने के लिए बस कंडक्टर के तौर पर भी काम किया है।

    सच हुआ मां का आशीर्वाद, पार्षद से हारे लेकिन मंत्री बने

    हार से निराश मत हो बेटाए एक दिन तू मंत्री बनेगा3! वर्ष 1999 में पार्षद का चुनाव हारने के बाद मायूस कैलाश को माता चुकीदेवी ने दुलार करते हुए कहा था कि बेटा आज पार्षद का चुनाव हारा हैए लेकिन एक दिन मंत्री बनेगा। अब जब मोदी सरकार में मंत्री बनने की खबर मिली तो मां की 20 साल पुरानी बात ताजा हो गई। हालांकि मां अब इस दुनिया में नहीं रही। लेकिन वे यादें अभी भी जिंदा हैं। कैलाश की सफलता के बाद परिवार में खुशी छा गई।

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