सांचौर विधानसभा में पार्टी से ज्यादा व्यक्ति विशेष का रहता है डंका –  देखे 1993 से 2018 तक के  विधानसभा चुनावों का चिट्टा 

– 1980 में कनक राज मेहता व 2008 में जीवाराम चौधरी ने निर्दलीय से चुनाव जीत कर निकाल चुंके है विधायक की सीट 
– आगामी विधानसभा में भाजपा के कई दावेदार नहीं कर दे स्वयं की पार्टी के लिए दिक्कते पैदा
– सुखराम विश्नोई जता रहे है कांग्रेस से प्रबल दावेदारी, वही दूसरी तरफ भाजपा से पूर्व विधायक जीवाराम चौधरी सहित दानाराम व सांसद देवजी पटेल का नाम भी आ रहा है सामने  
राजस्थान भारती. वरुण शर्मा 
सांचौर में चाहे सुखराम विश्नोई, जीवाराम चौधरी या कनक राज मेहता की विधानसभा चुनाव में जीत हो वह पार्टी से ज्यादा व्यक्ति विशेष की जीत है, चाहे उसके पीछे बाहुल्य वोट बैंक का समर्थन हो या अन्य कोई कारण मगर सांचौर विधानसभा में व्यक्ति विशेष का दबदबा हर विधानसभा चुनाव में देखने को मिलता है। जहां मोदी लहर में 2013 में सुखराम विश्नोई ने सीट निकाली तो जीवाराम चौधरी ने 2018 में पार्टी के टिकट नहीं देने पर निर्दलीय से चुनाव जीता।
चार बार विधायक का चुनाव लड़ चुके जीवाराम, एक बार ओर सांचौर विधानसभा में किस्मत आजमा रहे है  :
चार बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके जीवाराम चौधरी एक बार फिर भाजपा से दावेदारी जता रहे है। जीवाराम चौधरी ने पिछले चार बार चुनाव लड़ा है जिसमें दो बार जीत तो दो बार हार का सामना भी करना पड़ा है। जीवाराम ने एक बार भाजपा से तो एक बार निर्दलीय से विधायक की कुर्सी हासिल की है।
जाने 1993 से 2018 तक की सांचौर विधानसभा की हलचल जहां परिणाम उम्मीद से अलग ही होते है…..
1. सन् 1993 कांग्रेस से हीरालाल विश्नोई व भाजपा से मोतीराम आमने सामने थे। विश्रोई ने 56824 वोटों के साथ विधायक की कुर्सी पर कब्जा किया और मोतीराम को 44916 वोटो के साथ संतुष्ट होकर हार का सामना करना पड़ा।
2. कांग्रेस से हीरालाल विश्रोई 1998 में एक बार फिर कांग्रेस से टिकट लाकर मैदान में थे भाजपा नए नेहरे के रुप में जीवाराम चौधरी को मौका दिया। परिणाम कांग्रेस की जीत व भाजपा की हार रही और जीवाराम पहले ही चुनाव में हार गए। हीरालाल को 62710 व जीवाराम को 57515 वोट मिले।
3. 2003 में भाजपा से जीवाराम चौधरी व कांग्रेस से हीरालाल विश्नोई आमने सामने थे। भाजपा ने चुनावों में जीत दर्ज की और जीवाराम को 107950 व हीरालाल को 63380 वोट मिले और विधानसभा चुनाव में जीवाराम ने पहली जीत हासिल की।
4. 2008 में भाजपा ने जीवाराम चौधरी का टिकट काट दिया और जीवाराम ने निर्दलीय चुनाव लड़ा जिसमें दोनों पार्टीयों को हरा कर निर्दलीय सीट निकाल कर विधायक की कुर्सी पर कब्जा किया। इस चुनाव में जीवाराम चौधरी को 55257 व सुखराम विश्रेाई को 51643 वोट मिले।
5. 2013 में भाजपा से जीवाराम एक बार फिर मैदान मेंं थे और दूसरी तरफ कांग्रेस से सुखराम विश्नोई एक बार हार के पुन मैदान में थे। इस बार कांग्रेस से सुखराम ने चुनाव जीत कर खाता खोला। इस चुनाव में सुखराम को 103663 व  जीवाराम को 79608 वोट मिले।
6.  2018 विधानसभा को लेकर भाजपा से कई दावेदार सामने आ रहे है तो कांग्रेस से सुखराम  नाम ही सामने आ रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी की कई आपसी लड़ाई पार्टी को कमजोर नहीं कर दे।